फर्जी पंजीयन मामले में तहसीलदार और पटवारी के खिलाफ कार्रवाई करने कलेक्टर साहब का छूट रहा पसीना !

# Admin | 09 Feb, 2022

फर्जी पंजीयन मामले में तहसीलदार और पटवारी के खिलाफ कार्रवाई करने कलेक्टर साहब का छूट रहा पसीना !

◆ सिर्फ तुलसी खरीदी केंद्र प्रभारियों पर एफआईआर के निर्देश देकर खुद की पीठ थपथपा रहे भ्रष्ट प्रशासनिक अफसर

◆ मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे प्रशासनिक अफसर

★ डायमंड शुक्ला

मिशन क्रांति न्यूज जांजगीर -चाम्पा। जिले में पंजीयन की गड़बड़ी मामले में बेपरवाह तहसीलदार और गिरदावरी करने वाले लापरवाह पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई करने कलेक्टर जितेंद्र शुक्ला का पसीना छूट रहा है हालाकि धान खरीदी मामले में मामला शांत कराने खुद की पीठ थपथपाने तहसील के कम्प्यूटर ऑपरेटर रामकुमार कुर्रे,.तुलसी के कम्प्यूटर ऑपरेटर प्रहलाद कश्यप और किरित के आपरेटर गांधी दास और तुलसी केंद्र प्रभारी अजय नागेश और किरित उपार्जन केंद्र प्रभारी रामनारायण कश्यप सहित पांच छोटे कर्मचारियों को टारगेट कर आनन-फानन में महज चंद दिनों में जांच के निर्देश देकर प्रतिवेेेदन आने के बाद एफआईआर कराा दिए।

लेकिन पंजीयन करने वाले जिम्मेदार अफसर, तहसीलदार और मौके पर जाकर गिरदावरी करने वाले पटवारी के खिलाफ एफआईआर करने कलेक्टर जितेंद्र शुक्ला का पसीना छूटने लगा है।

दरअसल कलेक्टर श्री शुक्ला ने जिले में हुई फर्जी पंजीयन में संलिप्त तहसीलदार,पटवारी,आरआई, आरईओ और पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही थी लेकिन महज तुलसी और किरित धान खरीदी केंद्र के चंद छोटे कर्मचारियों पर एफआईआर कराने के बाद तहसीलदार पटवारी और राजस्व अमलों को अभयदान दे दिया गया। जो कलेक्टर श्री शुक्ला के नाकामी और दोषियों पर पक्षपात को उजागर करता है इतना ही नहीं कलेक्टर श्री शुक्ला ने तुलसी केंद्र को टारगेट कर, दुर्भावना से संबंधित चंद कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर करा दिया। अगर मामले को गंभीरता से लेते और निष्पक्ष कार्रवाई करते तो शायद तुलसी धान खरीदी केंद्र के अलावा जिले के 239 केंद्रों के ज्यादातर केंद्र में पंजीयन और खरीदी संबंधी गड़बड़ी के लिए कई दर्जन कर्मचारी लपेटे में आते और उनके खिलाफ एफआईआर भी होता। लेकिन जिस तरह महज तुलसी केंद्र को टारगेट किया जा रहा है वह दुर्भावना की कार्रवाई मानी जा रही है। जिले में इस तरह की गड़बड़ी को लेकर शासन-प्रशासन दोनों कटघरे में है कि आखिर कृषि प्रधान जिले में इस तरह की करोड़ो की फर्जी धान खरीदी के खेल के लाए जिम्मेदार कौन है, यह बड़ा सवाल है कि शासन की महती योजना और इतने गंभीर मामले को भी कलेक्टर श्री शुक्ला द्वारा गंभीरता से क्यों नहीं लिया जा रहा है।

मामले को हल्के में ले रहे भ्रष्ट प्रशासनिक अफसर !

कृषि प्रधान जिले में पंजीयन की गड़बड़ी के फेर में हुई करोड़ो की फर्जीवाड़े को भ्रष्ट प्रशासनिक अफसर बहुत हल्के में ले रहे हैं, शायद यही वजह है कि धान खरीदी में पहली बार लापरवाह और भ्रष्ट अफसरों के चलते सरकारी जमीन पंजीयन हो गया,खरीदी भी हो गई और भुगतान भी हो गया। 

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