CG High Court : हाईकोर्ट के फैसले को भी नहीं मान रहे अधिकारी, मनमुताबिक कर रहे व्याख्या.......

# Admin | 11 Dec, 2023

🔷 संशोधन निरस्तीकरण के आदेश को ठहराया था गलत।

मिशन क्रांति न्यूज़ जांजगीर- चाम्पा। शिक्षक प्रमोशन संशोधन निरस्तीकरण मामले में शिक्षकों की व्यथा थमने का नाम ही नहीं ले रही है। जहां एक ओर न्यायालय ने अपने 3 नवम्बर् 2023 के आदेश में संशोधन निरस्तीकरण के आदेश को ही गलत बताते हुए समाप्त कर दिया और शिक्षकों को पूर्व की शाला में जॉइन कर वेतन प्रदान करने का फैसला दिया, किंतु उच्च अधिकारियों द्वारा पूर्व की शाला की गलत व्याख्या करते हुए, ना तो उन्हें संशोधित शाला में और ना ही पदोन्नत शाला में जॉइनिंग करने का अवसर प्रदान किया गया और ना ही वेतन की समस्या हल हुई। 

जिससे व्यथित शिक्षकों ने उक्त आदेश के खिलाफ एक नई याचिका उच्च न्यायालय में दाखिल की और उस याचिका की सुनवाई में न्यायालय ने  5 दिसंबर को अपने पूर्व के फैसले की व्याख्या करते हुए और प्रतिवादी पक्ष को फटकार लगाते हुए स्पष्ट रूप से यह कहा कि, न्यायालय के आदेश के बावजूद शिक्षकों को पूर्व की शाला में (जो कि न्यायालय के अनुसार संशोधित शाला है, जहां से शिक्षकों को अंतिम बार वेतन प्राप्त हुआ है) जॉइन ना करने देना एवं वेतन की समस्या हल न करना जानबूझकर की गई गलती है। 

जो कि न्यायालय के आदेश के अवहेलना की श्रेणी में आता है एवं न्यायालय ने अपने पूर्व के आदेश की व्याख्या करते हुए यह भी कहा कि, चुंकि 4 अक्टूबर 2023 का संशोधन निरस्तीकरण का आदेश ही समाप्त किया जा चुका है। ऐसे में इस अवधि के दौरान शिक्षकों को मिलने वाली वे सुविधाएं जिनसे वे वंचित हुए हैं, दी जानी चाहिए जो शिक्षकों को सामान्य समय में प्राप्त होती। यानी कि वेतन के संबंध में भी उक्त दिवस को कार्य दिवस मानते हुए वेतन प्रदान करने की बात कही गई है। 

जैसा कि पूर्व में भी स्पष्ट था कि अंग्रेजी के आदेश शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों की समझ से परे होते हैं। एक बार फिर से वही स्थिति निर्मित हुई है और आज 7 दिन बीत जाने के बावजूद शिक्षकों की शाला में वापसी नहीं हो पाई है, ना ही वेतन के संबंध में कोई हल निकला है। 


 

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