50 राईस मिलरों ने जमा नहीं किया 30 करोड़ का चावल........... 

# Admin | 02 Nov, 2023


50 राईस मिलरों ने जमा नहीं किया 30 करोड़ का चावल........... 

मिशन क्रांति न्यूज़ रायगढ़। पहले सरकारी धान को उठाकर बाहर बेच दिया। चावल कूटा तो उसको भी दूसरे राज्यों में ऊंची दरों पर सप्लाई कर दिया। अब वे राइस मिलर चावल जमा नहीं कर पाए। 31 अक्टूबर को एफसीआई और नान में चावल जमा करने की मियाद खत्म हो गई। अब भी करीब 50 मिलर ऐसे हैं जिन पर करीब 30 करोड़ का चावल बकाया है। 

कितनी अजीब बात है कि हर वित्तीय वर्ष में धान उठाकर उसका चावल जमा करने में अगला वित्तीय वर्ष भी गुजर जाता है। वर्ष 22-23 में राइस मिलरों ने धान तो उठा लिया लेकिन उसका चावल अब तक बकाया है। मार्कफेड ने राइस मिलरों को पहले 30 सितंबर और फिर 31 अक्टूबर तक चावल जमा करने की मोहलत दी थी। मंगलवार को मियाद पूरी हो गई लेकिन अब तक करीब 50 मिलर ऐसे हैं जिन्होंने चावल जमा नहीं किया है। मिली जानकारी के मुताबिक नान में 2006 एमटी और एफसीआई में 5080 एमटी चावल जमा करना बाकी है। इसकी कीमत करीब 30 करोड़ होती है। मतलब 50 राइस मिलरों ने इतना चावल जमा ही नहीं किया जबकि उनको धान मिले आठ महीने से अधिक समय बीत चुका है।

अब फिर से मियाद बढ़ाने की मांग की जा रही है। जब तक पूरा चावल जमा नहीं होता, नए सीजन के लिए पंजीयन भी नहीं होगा। समिति प्रबंधकों से ली रकम, इसलिए धान नहीं राईस मिलरों के जरिए हो रहे इस घोटाले को खत्म करना बेहद जरूरी है। समितियों में अंतिम दिनों में चावल की कमी हो जाती है क्योंकि वहां बोगस खरीदी की जाती है। इस पर कार्रवाई करने के बजाय एडजस्ट किया जाता है। भौतिक रूप से धान नहीं होता लेकिन डीओ काटे जाते हैं। समिति प्रबंधक और राइस मिलर के बीच प्रति क्विंटल धान का एक रेट तय किया जाता है। इसके बाद मिलर धान उठाव की पुष्टि कर देता है। इधर समिति में जीरो शॉर्टेज हो जाता है और मिलर को बिना धान उठाए एक मोटी रकम मिल जाती है। उसी से धान खरीदकर मिलिंग की जाती है। जब बाहर से अतिरिक्त धान नहीं मिलता तो राइस मिलर फंस जाता है। यही हर साल होता है।


 

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