फ्लाईएश ब्रिक्स प्लांटों का सत्यापन नहीं, झूठे हैं उत्पादन के दावे............

# Admin | 30 Oct, 2023

फ्लाईएश ब्रिक्स प्लांटों का सत्यापन नहीं, झूठे हैं उत्पादन के दावे............

मिशन क्रांति न्यूज़ रायगढ़। पावर प्लांटों से निकल रहे फ्लाई एश के यूटीलाइजेशन के लिए सरकार ने ब्रिक्स प्लांटों को प्रोत्साहन दिया। प्लांट लगा लिए गए लेकिन अब ये सिर्फ कागजों में दिखते हैं। क्षमता के हिसाब से उत्पादन होता ही नहीं है। इधर पावर प्लांटों से हर साल करीब आठ लाख एमटी एक अधिक एश इन ब्रिक्स प्लांटों में खपाए जाने की जानकारी दी जाती है। दरअसल ब्रिक्स प्लांटों का सत्यापन ही नहीं होता। बिजली संयंत्रों से निकलनी वाली राख जिले में पर्यावरण प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण है। इसका शतप्रतिशत यूटीलाइजेशन दिखाने के लिए उद्योग झूठी रिपोर्ट देते हैं।

वर्ष 21-22 में जिले के प्लांटों से करीब 1.29 करोड़ एमटी एश उत्सर्जित हुआ। इसमें से 8.59 लाख एमटी एश फ्लाई एश ब्रिक्स प्लांट बनाने में उपयोग किया गया। इसी तरह 22-23 में कुल 1.51 करोड़ एमटी एश का उत्सर्जन हुआ और ब्रिक्स प्लांटों में 8.22 लाख एमटी का यूटीलाइजेशन हुआ। ये आंकड़े जिले के ब्रिक्स प्लांटों में वास्तविक उत्पादन की तुलना में बहुत अधिक है। दरअसल कई ब्रिक्स प्लांट केवल कागजों में चल रहे हैं। इनका सत्यापन नहीं होता इसलिए प्लांटों के झूठे आंकड़े स्थापित हो जाते हैं।

करीब सौ ब्रिक्स प्लांट रायगढ़ में चल रहे हैं। इनके उत्पादन का आंकड़ा बेहद कम है। इन ब्रिक्स फैक्ट्रियों में एश खपत की मात्रा बेहद कम है तो फिर बाकी मात्रा कहां खपाई जाती है। पावर प्लांट अपने फ्लाई एश का एकाउंट सेटल करने के लिए ऐसी जानकारी सबमिट करते हैं। सीमेंट बनाने में कम हुई खपत। 
वर्ष 21-22 में पावर प्लांटों से सीमेंट फैक्ट्रियों को सप्लाई की गई एश की मात्रा 2.79 लाख एमटी थी। यह मात्रा 22-23 में घटकर 1.81 लाख एमटी रह गई है। मतलब दो साल में सीमेंट प्लांट में खपत घट गई और लैंड फिलिंग में बढ़ गई। इसीलिए अवैध डंपिंग के मामले भी बढ़ गए।

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